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सूचनाधिकार के रथ पर आयेगी जे. पी. की संपूर्ण-क्रांति

मैने व्यक्तिगत तौर पर कभी भी जे. पी. आंदोलन का समर्थन नहीं किया. इस आंदोलन का एकसूत्री प्रोग्राम था “इंदिरा को हटाओ”, और इसके लिये “संपूर्ण क्रांति” लाने का सपना दिखाया गया. लेकिन संपूर्ण क्रांति की कौन कहे, मामूली क्रांति भी नहीं आयी, उल्टे देश को जातिवाद और सांप्रदायिकता की आग में झोंकनेवाले नेताओं के हाथ जरूर मजबूत हुए और वे भी सत्तासीन हुए. जे.पी. आंदोलन की सिर्फ एक बात मुझे पसंद आयी थी – जे.पी. ने आह्वान किया था -हर गली- मोहल्ले और गाँव- कस्बे में आम जनों की निगरानी समितियों का गठन करो जिनका काम होगा चुने हुए जनप्रतिनिधियों और सरकारी बाबुओं-पदाधिकारियों पर नजर रखना और उनके भ्रष्टाचार को उजागर करना. ये समितियाँ बनीं तो जरूर, लेकिन सिर्फ जुलूस, हड़ताल, धरने और बंद की हंगामा - राजनीति के लिये. जे. पी. के चेले सत्ता में आये, तो ये समितियाँ भी गायब हो गयीं.यदि निगरानी समितियाँ रहने दी जातीं तो अपने वर्तमान आकाओं की नाक में ही दम किये रहतीं. हर सरकारी स्कीम का लाभ ये समितियाँ भ्रष्ट अफसरों से छीनकर जरूरतमंदों तक पहुँचा सकती थीं, सरकारी दफ्तरों में जाकर पूछ सकती थीं कि अमुक व्यक्ति का काम...

नरसिंह राव: एक मूल्यांकन यह भी

नरसिंह रावजी में कुछ खास बातें थीं, यदि उन्होंने समझ लिया कि अमुक समस्या का समाधान नहीं है तो वे उसे टालते जाते थे और कुछ करके नया विवाद पैदा कर उस समस्या को अधिक उलझाने से बचते थे, उनका विश्वास था कि ऐसी समस्यायें समय के साथ स्वतः सुलझ जाती हैं. उनकी सबसे अधिक अनुकरणीय विशेषता थी कि अपने पूरे राजनैतिक जीवन में उन्होने शायद ही कभी कोई विवादास्पद वक्तव्य दिया हो. उन्हें कभी यह कहने की जरूरत ही नहीं पड़ी कि मैंने ऐसा नही कहा और मीडिआ ने मेरी बातों को तोड़ मरोड़कर पेश किया है. आलोचकों के द्वारा बार-बार “मौनी बाबा” एवं “निष्क्रियता और अनिर्णय की प्रतिमूर्ति” कहे जाने के बाद भी उन्होंने न तो अपनी कार्यशैली बदली, न किसी के खिलाफ कुछ बोले, न ही कभी बौखलाकर कुछ सफाई दी और न कभी किसी पर कोई आरोप लगाया. नरसिंह रावजी अद्भुत और प्रकांड विद्वान थे. साइंस और लॉ में स्नातक होने के साथ-साथ 17 देशी विदेशी भाषाएं लिखने, पढ़ने और बोलने में पारंगत थे. एक ही व्यक्ति में विज्ञान, कानून और साहित्य के साथ राजनीति का ऐसा मणिकांचन संयोग असंभव नहीं तो दुर्लभ जरूर है. 70 वर्ष की उम्र में उन्होंने कंप्युटर पर काम...

रैगिंग- क्या, क्यों और क्यों नहीं ?

हर वर्ष नये एडमिशन के बाद पूरे देश के अनेक इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट और कुछ अन्य कॉलेजों में जब नये छात्र प्रवेश लेते हैं, तो पुराने सीनियर छात्र उन्हें नये माहौल में ढालने के नाम पर उनकी रैगिंग करते हैं. रैगिंग का मतलब ही होता है किसी की इतनी खिंचाई करना कि उसके व्यक्तित्व और स्वाभिमान के चीथड़े- चीथड़े हो जाएं. कई सीनियर छात्रों के द्वारा किसी एक नये छात्र को घेरकर ऊलजलूल सवाल करना और हर जबाब को गलत बताते हुए खिल्ली उड़ाना, ऊटपटांग हरकतें करवाना, गालीगलौज और अश्लील बातें करके नये छात्रों को मानसिक और शारीरिक यंत्रणा देना ही रैगिंग है. रैगिंग के परिणाम स्वरूप हर वर्ष दो-चार छात्र आत्महत्या कर लेते हैं, कुछ मानसिक रूप से गंभीर बीमार हो जाते हैं. वैसे तो अधिकांश नये छात्र रैगिंग के फलस्वरूप अल्ट्रामॉडर्न बन जाते हैं, लेकिन कुछ लड़कों को रैगिंग के दौरान जबर्दस्त झटका लगता है. वे जो कुछ बचपन से किशोरावस्था तक पहुंचने में सीखे हुए होते हैं, सब एक झटके में धराशायी हो जाता है. यहां तो हर वाक्य में “मां-बहन” को लपेटती हुई बुरी- बुरी गालियां दी जाती हैं, सिखाई और रटवाई जाती हैं, वर्जित सेक्स ...

अच्छा लगा मुस्लिम आतंकवादियों के खिलाफ एक इस्लामिक फ़तवा

खबर है कि लखनऊ की एक 400 साल पुरानी संस्था ‘दारुल इफ्ता फिरंगी महल’ ने सोमवार को उन आतंकवादियों के खिलाफ फ़तवा दिया है जो पूजास्थलों पर हमले कर निर्दोष लोगों की हत्या कर देते हैं. लखनऊ ईदगाह के पूर्व इमाम और फिरंगी महल के प्रमुख मौलाना खालिद रशीद ने स्थानीय व्यापारी साजिद उमर के एक लिखित सवाल के जबाब में फ़तवा देते हुए कहा , “इस्लाम में आतंकवाद के लिये कोई जगह नहीं है, बत्तीसवीं आयत के अनुसार एक भी निर्दोष व्यक्ति की हत्या पूरी मानवता की हत्या है. आयत 107 के अनुसार तो हज़रत साहब का मकसद सिर्फ आदमियों का कल्याण नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सभी जीव- जंतुओं और पेड़- पौधों की हिफ़ाजत है. हज़रत साहब पर अनेक कातिलाना हमले हुए, उन्हें परेशान एवं बेइज्जत करने की अनेक कोशिशें उनके जीवन काल में की गयीं , लेकिन उन्होंने सभी को माफ कर दिया और कभी भी कोई हिंसक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की. हज़रत मोहम्मद साहब किसी भी धर्म के पूजा स्थल को जरा सा भी नुकसान पहुंचाने के सख्त खिलाफ थे.” जनाब मौलाना रशीद ने अपने फतवे में आगे कहा है कि इस्लाम ने हमेशा शांति और सामाजिक समरसता पर जोर दिया है, इसीलिये यदि कोई भी मुस्लिम...

आतंकवादियों के खिलाफ खुलकर खड़े हों समझदार मुस्लिम भाई

बनारस के संकटमोचन मंदिर की लोमहर्षक घटना के बाद लखनऊ की एक 400 साल पुरानी संस्था ‘दारुल इफ्ता फिरंगी महल’ ने उन आतंकवादियों के खिलाफ फ़तवा दिया जो पूजास्थलों पर हमले कर निर्दोष लोगों की हत्या कर देते हैं. बनारस एवं अन्य कुछ जगहों पर भी इसी प्रकार के फतवे दिये गये. लखनऊ ईदगाह के पूर्व इमाम और फिरंगी महल के प्रमुख मौलाना खालिद रशीद ने स्थानीय व्यापारी साजिद उमर के एक लिखित सवाल के जबाब में फ़तवा देते हुए कहा , “इस्लाम में आतंकवाद के लिये कोई जगह नहीं है, बत्तीसवीं आयत के अनुसार एक भी निर्दोष व्यक्ति की हत्या पूरी मानवता की हत्या है. आयत 107 के अनुसार तो हज़रत साहब का मकसद सिर्फ आदमियों का कल्याण नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सभी जीव- जंतुओं और पेड़- पौधों की हिफ़ाजत है. हज़रत साहब पर अनेक कातिलाना हमले हुए, उन्हें परेशान एवं बेइज्जत करने की अनेक कोशिशें उनके जीवन काल में की गयीं , लेकिन उन्होंने सभी को माफ कर दिया और कभी भी कोई हिंसक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की. हज़रत मोहम्मद साहब किसी भी धर्म के पूजा स्थल को जरा सा भी नुकसान पहुंचाने के सख्त खिलाफ थे.” जनाब मौलाना रशीद ने अपने फतवे में आगे कहा है ...

चलते हैं नये सप्लायर छब्बे बनने, दूबे बनकर लौटते हैं

नवोदित राज्य झारखंड में नये –नये युवा सप्लायरों की भरमार हो गयी है, कुछ तो बेरोजगारी के कारण और कुछ इस भ्रम में कि सरकारी सप्लाई में बहुत फायदा है. कोटेशन मांगने की त्रुटिपूर्ण पद्धति के कारण भी हर बार अनेक सप्लायर मैदान में उतरते हैं और अपने हाथ जला बैठते हैं. विभागों के कर्मचारी ही अपने चहेतों को खबर कर देते हैं कि उनके विभाग में एक बड़ा टेंडर निकलनेवाला है और वे अपने लिये ऑफिस के अलावे भी कमीशन पहले से ही तय कर लेते हैं. कुछ नये रंगरूट तो अखबारों में टेंडर के विज्ञापन देखकर अपना भाग्य आजमाने निकल पड़ते हैं. हर बार कुछ नये आपूर्तिकर्ता काम करने के लोभ में कम से कम दर का कोटेशन दे देते हैं, उन्हें न तो माल की क्वालिटी की जानकारी होती है और न विभाग में दिये जानेवाले कमीशन की. अखबार में उसने पढ़ लिया कि अमुक विभाग में 15 फुट लंबी और 12 फीट चौड़ी दरियां सप्लाई करनी हैं, उसने सुन रखा है कि सप्लाई में बहुत फायदा होता है. बस निकल पड़ा बाजार में और दरी बेचनेवालों से उसने उनके रेट ले लिये, दरी की मोटाई, वजन और धागों की क्वालिटी का न तो उसे ज्ञान है और न उसने जानने की ही कोशिश की क्योंकि उसे पता है...

हाँ, उपाय तो हैं सरकारी खरीद में धांधली रोकने के

हर वर्ष झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों के द्वारा अरबों रुपयों की खरीद की जाती है जिसमें तीस प्रतिशत से अधिक कमीशन की बंदरबाँट लगातार होती जा रही है . जब अरबों रुपयों के घपले मामूली हो गये हों तब सरकारी खरीद एवं कामों में लाखों – करोड़ों की धांधली तो किसी गिनती में नहीं आती. खरीद की प्रक्रिया के लिये सरकारी नियम बने हैं, हर स्तर पर ऑडिट का प्रावधान है, फिर ऐसा क्यों होता है कि ये घपले होते रहते हैं और तभी इनपर उँगली उठती है जब सरकारें बदलती हैं. दस बीस दिन तो घपलों की खबरें मीडिआ में छाई रहेंगी, संबंधित मंत्रियों को भी लपेटा जायेगा, उसके बाद जांच बैठाई जायेगी, मुकदमे चलेंगे, दस बीस सालों के बाद लोअर कोर्ट में कुछ लोगों को सजा भी हो जायेगी जिसे मीडिआ में पुनः उछाला जायेगा, केस उच्च एवं उच्चतम न्यायालय में जायेगा और फिर पाँच दस सालों के बाद इस या उस टेक्निकल ग्राउंड पर सब टाँय –टाँय फुस्स हो जायेगा. आम जनता कहती है कि चारों ओर भ्रष्टाचार है, नेता कहते हैं कि भ्रष्टाचार के कारण ही विकास नहीं हो रहा, अखबार तो भ्रष्टाचार की खबरों से ही रंगे रहते हैं. लेकिन इसे रोकने के सार्थक उपाय खोजने की ...