किसी भी राजधानी की अपनी जरूरतें होती हैं, पूरे राज्य का प्रशासन वहीं से होता है, नीतियां वहीं बनती हैं, सारे मंत्रालय और सचिवालय वहीं होते हैं, बडी बडी कंपनियों के दफ्तर वहीं होते हैं, राज्य के दूसरे जिलों से अपना काम लेकर आने वालों की भीड दिन में तो बेइन्तिहा बढती ही है और रात में भी रुककर दूसरे दिन काम करने वालों की संख्या काफी होती है. राजधानी में दिन की इसी बढी आबादी के कारण आम नगरों से अधिक सशक्त सुविधाओं की जरूरत होती है. राजधानी की तुलना अन्य आम नगरों से नहीं की जा सकती. किसी भी राज्य की राजधानी में ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य की बेहतरीन सुविधाएं अपेक्षित रहती हैं. इतने बड़े-बड़े कार्यालयों में सारे काम सुचारू रूप से चलें , इसी के लिये जरूरी है कि राजधानी में बिजली, पानी, सडकें, ट्रैफिक, विधि-व्यवस्था, अस्पताल, साहित्य-कला-संस्कृति-संगीत, स्कूल-कॉलेज, खेल-कूद, और मनोरंजन आदि की सुविधाएं उच्च स्तर की हों. रांची का राजधानी के रूप में विकास की कौन कहे, इसका तो सामान्य नगर के रूप में भी विकास अभी तक प्रतीक्षित है. ग्रेटर रांची, रिंग रोड और फ्लाइ ओवरों के शिगूफे टांय टांय फिस्स हो गये, ट्र...
कुछ कहने की इच्छा, कुछ सुनने का मन - Prabhakar Agrawal